अनुभूतियों का आकाश
Sunday, April 8
Wednesday, March 7
होली है
रिश्ते सब
रंगीन हो गए
दिल में ऐसा बिखरा रंग
नागिन धुन पर
बीन हो गए
रिश्ते सब रंगीन हो गए
उनके गालों पर
पीला रंग
सुर्ख होंठ और
चोली तंग
ताऊजी संगीन हो गए
रिश्ते सब रंगीन हो गए
छिप कर देखूं
ताकू झाँकू
नज़र बचाकर
सबको जांचू
आस पास के
मीठे रिश्ते
होली में नमकीन हो गए
रिश्ते सब रंगीन हो गए
मन जब रंग बिरंगा होता
ज्येष्ठ, ससूर का
रिश्ता सोता
नजर बचा कर सारे रिश्ते
देवर बने
हसीन हो गए
रिश्ते सब रंगीन हो गए
( होली की हुडदंगी और हार्दिक शुभकामनाएं )
-कुश्वंश
Thursday, February 23
आफ्सीन.....रिश्ते
वो पल
जो हसीन होते हैं,
वो बहुत
नामचीन होते है,
ढूंढ कर लाओ,
तलाशों,
रोशनी के चिराग,
कोशिश करो दोस्त,
ये बहुत
खुर्दबीन होते है,
सोचता हूँ के
कह दूं
अंतर में धसे
निरे शब्द,
यूं तो ये रिश्ते भी
सब
तमाशबीन होते है,
अमराईयों में भी आजतक
चिपके है
हुलसे हुए दिल,
सच में
कुछ रिश्ते तो
बेहद
निरीह, दीन होते हैं,
सोचता हूँ तो
बहुत दूर तलक जाता हूँ,
लौटता हूँ तो फकत
नाम भूल जाता हूँ,
तुमने ढूंढें थे जो रिश्ते
सड़क में
गलियों में,
कितने भी मजबूत हों मगर
सब आफ्सीन होते है .
-कुश्वंश
Friday, February 3
मेरा नाम
कभी कभी
अन्दर से निकल कर
जब मैं
बाहर आ जाता हूँ
तो स्वयं को पहचान ही नहीं पाता हूँ
खो जाती है मेरी पहचान
वो जो
कभी तुमने
कभी औरों ने दी
मैं तो बस इसके उसके
मुह को ताकता हूँ
और गुजारिश करता हूँ
मुझे देदो कोई नाम
जो सिर्फ मेरा अपना हो
और मैं
कभी स्कूल बस के पीछे भागता हूँ
कभी मोहल्ले की उस
कोने वाली लडकी के पीछे
और चांटे खाकर
थका हारा
किसी और के पीछे भागता हूँ
कालांतर में
आटा दाल के पीछे
और उसके बाद
भावनाओं के समुन्दर में
बच्चो की दया के पीछे
पत्नी भी घिसटती है साथ साथ
मै नाम पूछता हूँ
वो विद्रूप हंशी हंसती है
मगर मेरा नाम नहीं बताती
जानते हुए भी
मन ही मन
कई बार बुदबुदाती है
और अन्दर ही अन्दर कई बार बोलती है
खपच्चियों में कसा
एक नर कंकाल
जिसके सैकड़ों नाम है
मगर असल में कोई नहीं
नर कंकाल भी नहीं .
-कुश्वंश
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